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चंडीगढ़: पंजाब सरकार द्वारा लागू किए गए “जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026” को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। जालंधर निवासी सिमरनजीत सिंह ने जनहित याचिका दाखिल कर इस कानून को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है।
संविधान से टकराव का आरोप
याचिका में कहा गया है कि यह अधिनियम संविधान की मूल भावना और मौजूदा कानूनी ढांचे के विपरीत है। इसमें शामिल दंडात्मक प्रावधान और प्रक्रियाएं कई स्थापित कानूनों से टकराती हैं।
राष्ट्रपति की मंजूरी पर सवाल
याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह कानून समवर्ती सूची के विषयों को प्रभावित करता है और भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों से टकराव की स्थिति बनाता है। ऐसे में संविधान के अनुच्छेद 254(2) के तहत राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी थी, जबकि इसे केवल राज्यपाल की सहमति से लागू किया गया।
धर्मनिरपेक्षता पर उठे प्रश्न
याचिका में यह भी कहा गया है कि यह कानून केवल एक धार्मिक ग्रंथ को विशेष सुरक्षा प्रदान करता है, जिससे धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत पर सवाल खड़े होते हैं। अन्य धर्मों के ग्रंथों को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
समानता के अधिकार का मुद्दा
इस अधिनियम को संविधान में दिए गए समानता के अधिकार के उल्लंघन के रूप में भी चुनौती दी गई है। खासतौर पर धारा 5(3) को लेकर विवाद है, जिसमें बेअदबी की साजिश जैसे मामलों में उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान किया गया है।
सजा को बताया गया अनुपातहीन
याचिकाकर्ता के अनुसार, इस प्रकार के अपराध में प्रत्यक्ष हिंसा शामिल नहीं होती, फिर भी इतनी कठोर सजा का प्रावधान मनमाना और असंगत है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर असर
याचिका में कहा गया है कि ‘बेअदबी’ की परिभाषा अत्यधिक व्यापक है, जिसमें शब्द, संकेत और इलेक्ट्रॉनिक माध्यम भी शामिल हैं। इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।
कानून पर रोक की मांग
याचिका में अधिनियम के क्रियान्वयन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है। तर्क दिया गया है कि यदि बाद में यह कानून असंवैधानिक पाया जाता है, तो इसके तहत हुई कार्रवाई से नागरिकों को नुकसान हो सकता है।
हाल ही में हुआ था पारित
गौरतलब है कि 13 अप्रैल 2026 को पंजाब विधानसभा ने इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया था और उसी दिन राज्यपाल ने इसे मंजूरी दी। 20 अप्रैल को इसे राजपत्र में अधिसूचित किया गया।
जल्द हो सकती है सुनवाई
फिलहाल यह याचिका हाई कोर्ट की रजिस्ट्री में दाखिल की गई है और उम्मीद है कि इसे जल्द ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।

