कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 को लेकर एक बार फिर भारत, नेपाल और चीन के बीच विवाद गहराता नजर आ रहा है। लिपुलेख दर्रे के रास्ते यात्रा कराने की योजना पर नेपाल ने कड़ी आपत्ति जताते हुए भारत और चीन को आधिकारिक प्रोटेस्ट नोट भेजा है।
Highlights:
- नेपाल ने लिपुलेख मार्ग पर जताई आपत्ति
- भारत-चीन की यात्रा योजना पर विरोध
- 2026 में जून-अगस्त के बीच प्रस्तावित यात्रा
- नाथू ला और लिपुलेख से जाने की योजना
- सीमा विवाद को लेकर नया तनाव
Kailash Mansarovar Yatra: क्या है पूरा मामला
लिपुलेख मार्ग पर विवाद
भारत ने 2026 में कैलाश मानसरोवर यात्रा को दो मार्गों—सिक्किम के नाथू ला और उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे—से संचालित करने की घोषणा की है। हालांकि, नेपाल का कहना है कि लिपुलेख क्षेत्र उसके अधिकार क्षेत्र में आता है और बिना अनुमति वहां कोई गतिविधि नहीं होनी चाहिए।
नेपाल की आपत्ति: क्या कहा विदेश मंत्रालय ने
“अनुमति के बिना कोई गतिविधि नहीं”
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि:
- इस योजना की जानकारी नेपाल को पहले नहीं दी गई
- लिपुलेख क्षेत्र नेपाल का अभिन्न हिस्सा है
- किसी भी गतिविधि से पहले उसकी सहमति जरूरी है
नेपाल ने अपनी यह आपत्ति भारत और चीन दोनों को आधिकारिक तौर पर भेजी है।
सीमा विवाद की जड़ क्या है
सुगौली संधि से जुड़ा मामला
यह विवाद नया नहीं है, बल्कि 1816 की सुगौली संधि से जुड़ा हुआ है।
- नेपाल का दावा: काली नदी का स्रोत लिम्पियाधुरा से
- भारत का दावा: नदी का स्रोत इससे पूर्व में
इसी मतभेद के कारण कालापानी और लिपुलेख क्षेत्र को लेकर विवाद बना हुआ है।
2020 से बढ़ा विवाद
सड़क निर्माण बना कारण
मई 2020 में भारत ने उत्तराखंड के धारचूला से लिपुलेख तक सड़क का निर्माण किया था।
इसके बाद:
- नेपाल ने विरोध जताया
- नया राजनीतिक नक्शा जारी किया
- विवाद और गहरा गया
चीन की भूमिका भी अहम
2015 और 2025 के समझौते
भारत और चीन ने 2015 में लिपुलेख दर्रे को व्यापार और यात्रा के लिए खोलने पर सहमति जताई थी। 2025 में भी इस मार्ग को फिर से खोलने की बात हुई, जिसमें नेपाल शामिल नहीं था। नेपाल ने इस पर लगातार आपत्ति दर्ज कराई है।
यात्रा योजना और व्यवस्थाएं
2026 यात्रा का शेड्यूल
- समय: जून से अगस्त 2026
- कुल यात्री: लगभग 1000
- मार्ग: नाथू ला (सिक्किम) और लिपुलेख (उत्तराखंड)
- ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू
कैलाश मानसरोवर यात्रा जैसे धार्मिक आयोजन के बीच उभरा यह विवाद दक्षिण एशिया के जटिल सीमा मुद्दों को एक बार फिर सामने लाता है। नेपाल, भारत और चीन के बीच यह मतभेद आने वाले समय में कूटनीतिक स्तर पर और चर्चा का विषय बन सकता है। अब यह देखना अहम होगा कि तीनों देश इस संवेदनशील मुद्दे का समाधान बातचीत के जरिए निकाल पाते हैं या नहीं।

