तमिलनाडु की राजनीति में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या अभिनेता से नेता बने विजय 7 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले पाएंगे या नहीं?
तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के प्रमुख विजय ने हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी पार्टी को राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बना दिया। लेकिन सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने के लिए जरूरी बहुमत का आंकड़ा अभी भी उनके लिए चुनौती बना हुआ है।
बहुमत का गणित: कहां फंस रही है बात?
तमिलनाडु विधानसभा में कुल 234 सीटें हैं, जहां सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन जरूरी होता है।
- TVK को मिली सीटें: 108
- एक सीट से इस्तीफे के बाद: 107 विधायक
- बहुमत के लिए जरूरी: 118 विधायक
यानी TVK अभी भी बहुमत से 11 सीट दूर है।

कांग्रेस का समर्थन, लेकिन अभी भी दूरी
राजनीतिक समीकरणों में सबसे बड़ा बदलाव तब आया जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने TVK को समर्थन देने का ऐलान किया।
- कांग्रेस के विधायक: 5
- TVK + कांग्रेस = 112 विधायक
इसके बावजूद बहुमत के आंकड़े से 6 सीटों की कमी बनी हुई है।
यही कारण है कि सरकार बनाने का दावा अभी पूरी तरह मजबूत नहीं माना जा रहा।
राज्यपाल की भूमिका बनी अहम
तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर इस पूरे घटनाक्रम में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, राज्यपाल अभी तक TVK द्वारा पेश किए गए समर्थन के आंकड़ों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। यही वजह है कि सरकार गठन की प्रक्रिया में देरी हो रही है।
विजय की राज्यपाल से मुलाकात
बुधवार को विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया।
यह मुलाकात चेन्नई स्थित लोक भवन में हुई, जहां विजय ने अपने समर्थन का आंकड़ा पेश किया और सरकार बनाने का अवसर मांगा।
हालांकि, अंतिम फैसला अभी भी राज्यपाल के हाथ में है।

डबल जीत से बढ़ा कद
विजय ने इस चुनाव में
- तिरुचिरापल्ली ईस्ट
- पेरम्बूर
दोनों सीटों से जीत हासिल की।
यह जीत इस बात का संकेत है कि उनका प्रभाव अब सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीति में भी उनकी पकड़ मजबूत हो चुकी है।
तीन दशक पुराना राजनीतिक समीकरण टूटा
इस चुनाव का सबसे बड़ा असर यह रहा कि
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) और
अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK)
का करीब 30 साल पुराना दो-दलीय दबदबा टूट गया।
TVK ने पहली बार चुनाव लड़ते हुए ही बड़ा उलटफेर कर दिया, जो तमिलनाडु की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है।
क्या 7 मई को टल सकती है शपथ?
मौजूदा हालात को देखते हुए 7 मई को प्रस्तावित शपथ ग्रहण समारोह पर सवाल खड़े हो गए हैं।
अगर विजय अगले कुछ दिनों में:
- अन्य दलों या निर्दलीय विधायकों का समर्थन जुटा लेते हैं
👉 तो शपथ संभव है
लेकिन अगर बहुमत का आंकड़ा पूरा नहीं हुआ
👉 तो सरकार गठन में देरी या राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति बन सकती है
आगे क्या?
तमिलनाडु की राजनीति इस वक्त बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है।
- क्या विजय बहुमत साबित कर पाएंगे?
- क्या और दल उनका समर्थन करेंगे?
- या राज्य में नई राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिलेगी?
इन सभी सवालों के जवाब आने वाले कुछ दिनों में साफ हो जाएंगे।
विजय ने अपने पहले ही चुनाव में बड़ा राजनीतिक धमाका किया है, लेकिन सत्ता तक पहुंचने की राह अभी आसान नहीं है।बहुमत के आंकड़ों का गणित, सहयोगी दलों की राजनीति और राज्यपाल का फैसला—ये तीनों मिलकर तय करेंगे कि 7 मई को ‘विजय तिलक’ होगा या नहीं।
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