पटना। बिहार की राजनीति में इन दिनों एक नाम सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा है — निशांत कुमार। लंबे समय तक राजनीति और मीडिया की चमक से दूर रहने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे अब सक्रिय राजनीति में कदम रख चुके हैं। जेडीयू में उनकी औपचारिक एंट्री और बिहार कैबिनेट विस्तार में मंत्री बनाए जाने की चर्चाओं ने सियासी माहौल को गर्म कर दिया है। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या जेडीयू अब नई पीढ़ी के नेतृत्व की ओर बढ़ रही है?
8 मार्च 2026 के बाद बदल गई राजनीतिक तस्वीर
निशांत कुमार ने 8 मार्च 2026 को आधिकारिक रूप से जनता दल यूनाइटेड (JDU) का दामन थामा। इसके बाद से वे लगातार बिहार के अलग-अलग जिलों का दौरा कर रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच उनकी सादगी, शांत स्वभाव और लो-प्रोफाइल छवि की खूब चर्चा हो रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार के राष्ट्रीय राजनीति की ओर बढ़ने की संभावनाओं के बीच अब बिहार में पार्टी की कमान धीरे-धीरे निशांत कुमार को सौंपी जा सकती है।
शुरुआत में बड़े पद से किया था इनकार
दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में निशांत कुमार ने किसी बड़े राजनीतिक पद को लेने से साफ इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि बिना चुनाव जीते कोई बड़ी जिम्मेदारी लेना सही नहीं होगा। लेकिन अब हालात तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, उन्हें सम्राट चौधरी की कैबिनेट में शामिल किए जाने की तैयारी चल रही है। अगर ऐसा होता है तो यह उनकी राजनीति में औपचारिक और बड़ी एंट्री मानी जाएगी।
कितने पढ़े-लिखे हैं निशांत कुमार?
राजनीति में आने से पहले निशांत कुमार शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े रहे हैं।
उनकी शुरुआती पढ़ाई पटना के सेंट कैरेंस स्कूल में हुई। बाद में उन्हें मसूरी के मानव भारती इंटरनेशनल स्कूल भेजा गया, जहां उन्होंने आगे की स्कूली शिक्षा पूरी की।
BIT Mesra से की सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग
स्कूलिंग के बाद निशांत कुमार ने देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में गिने जाने वाले बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (BIT), मेसरा से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ समय तक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर भी काम किया। यानी राजनीति में आने से पहले उनका जीवन पूरी तरह तकनीकी और निजी प्रोफेशनल दुनिया से जुड़ा रहा।
राजनीति से हमेशा बनाई दूरी
राजनीतिक परिवार से आने के बावजूद निशांत कुमार लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन से दूर रहे। खासतौर पर मां मंजू सिन्हा के निधन के बाद उन्होंने खुद को राजनीति और मीडिया से लगभग अलग कर लिया था। करीबी लोगों के अनुसार, उनकी रुचि आध्यात्मिक जीवन की ओर ज्यादा बढ़ गई थी और वे बेहद सीमित दायरे में रहना पसंद करते थे।
दूसरी क्लास की वो घटना, जब गुस्से में स्कूल पहुंच गए थे नीतीश कुमार
निशांत कुमार से जुड़ा एक पुराना किस्सा आज भी बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बन जाता है। बताया जाता है कि जब वे दूसरी कक्षा में पढ़ते थे, तब स्कूल के एक शिक्षक ने उन्हें छड़ी से पीट दिया था। उस समय नीतीश कुमार विधायक थे।
बेटे के साथ मारपीट पर नाराज हो गए थे नीतीश
जैसे ही उन्हें घटना की जानकारी मिली, वे सीधे स्कूल पहुंच गए। कहा जाता है कि वे बेटे के साथ हुए व्यवहार से इतने नाराज थे कि उन्होंने तुरंत स्कूल से निशांत का नाम कटवा दिया। हालांकि सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने इस मामले में अपनी राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल नहीं किया और न ही कोई सार्वजनिक विवाद खड़ा किया। बाद में निशांत की पढ़ाई दूसरे स्कूल में कराई गई।
मां के निधन के बाद पूरी तरह बदल गया था स्वभाव
निशांत कुमार की मां मंजू सिन्हा पेशे से शिक्षिका थीं। साल 2007 में उनके निधन ने परिवार को गहरा झटका दिया था। करीबी लोगों का कहना है कि इस घटना के बाद निशांत पहले से ज्यादा शांत और निजी जीवन जीने लगे। करीब एक दशक तक वे सार्वजनिक कार्यक्रमों और राजनीतिक मंचों से लगभग दूर ही रहे। हालांकि 2024 के बाद वे कई मौकों पर नीतीश कुमार के साथ नजर आने लगे थे, जिसके बाद उनकी राजनीतिक एंट्री की चर्चाएं तेज हो गई थीं।
2025 चुनाव में पहली बार खुलकर आए सामने
2025 बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान निशांत कुमार पहली बार खुलकर मीडिया और जनता के सामने आए। उन्होंने लोगों से अपील की थी कि नीतीश कुमार को वोट दें क्योंकि उन्होंने बिहार के विकास के लिए काफी काम किया है। यहीं से यह संकेत मिलने लगे थे कि वे जल्द राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।
सादगी बनी सबसे बड़ी पहचान
मुख्यमंत्री के बेटे होने के बावजूद निशांत कुमार हमेशा बेहद सामान्य अंदाज में नजर आए हैं। वे न तो बड़े राजनीतिक बयानों के लिए जाने जाते हैं और न ही आक्रामक राजनीति के लिए। जेडीयू कार्यकर्ताओं के बीच उनकी यही सादगी और शांत स्वभाव उन्हें अलग पहचान दिला रहा है।
गांधी मैदान पर टिकी बिहार की नजर
पटना के गांधी मैदान में होने वाला कैबिनेट विस्तार अब सिर्फ मंत्री पदों के बंटवारे तक सीमित नहीं रह गया है। राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि निशांत Kumar को कौन-सी जिम्मेदारी मिलती है और जेडीयू उन्हें किस भूमिका में आगे बढ़ाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ एक मंत्री पद का मामला नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में नई पीढ़ी के औपचारिक उदय का संकेत भी हो सकता है।
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