निबंध, कविता, कहानी, सम्भाषण, काव्य पाठ एवं व्याकरण प्रश्नोत्तरी सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं का हुआ आयोजन
फरीदाबाद। हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत ब्लॉक स्तर पर विद्यार्थियों में हिंदी भाषा के प्रति रुचि, सृजनात्मकता एवं अभिव्यक्ति क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से विभिन्न साहित्यिक प्रतियोगिताओं का भव्य आयोजन किया गया। खण्ड शिक्षा अधिकारी श्री सतीश चौधरी के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम में ब्लॉक के 12 विद्यालयों के 100 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम में निबंध लेखन, कविता लेखन, सम्भाषण, कहानी लेखन, दृश्य-घटना वर्णन, काव्य पाठ, स्लोगन लेखन तथा व्याकरण प्रश्नोत्तरी जैसी विभिन्न प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं। विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा, कल्पनाशीलता और भाषा कौशल का शानदार प्रदर्शन करते हुए हिंदी के प्रति अपने अनुराग को अभिव्यक्त किया।
कार्यक्रम के नोडल अधिकारी हिंदी प्रवक्ता श्री बाँके बिहारी रहे। उन्होंने प्रतियोगिताओं के सफल संचालन एवं विद्यार्थियों के मार्गदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम को डाइट पाली के वरिष्ठ अधिकारी श्री जलवंत सिंह का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों एवं निर्णायकों के लिए जलपान तथा अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी श्री कुलदीप एवं श्री नरेन्द्र द्वारा संभाली गई।
प्रतियोगिताओं में निर्णायक की भूमिका का निर्वहन श्री नन्द किशोर, कविराज देवेंद्र गौड़, श्री रघु वत्स, श्रीमती हेमकुमारी, श्रीमती हेमा, श्रीमती अनुराधा ऋषि, श्रीमती रेखा, श्रीमती सीमा, श्रीमती वसुंधरा एवं श्रीमती धर्मवती ने किया। निर्णायकों ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों का सूक्ष्मता से मूल्यांकन करते हुए उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित किया।
भाषा, भेष, भोजन और भक्ति से होता है राष्ट्र का उत्थान : सतीश चौधरी
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं खण्ड शिक्षा अधिकारी श्री सतीश चौधरी ने अपने संबोधन में हिंदी भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रीमद्भगवद्गीता के संदर्भों के माध्यम से भाषा, भेष-भूषा, भोजन और भक्ति के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि जिस देश की भाषा, भेष-भूषा और भोजन व्यवस्था सुदृढ़ एवं संस्कारित होगी, उस देश की जनता का भौतिक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उत्थान भी निश्चित रूप से होगा।
उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, संस्कार, परंपरा और राष्ट्रीय अस्मिता की संवाहक है। विद्यार्थियों को हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग के साथ-साथ भारतीय भाषाओं और संस्कृति के प्रति गौरव का भाव रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएँ विद्यार्थियों की प्रतिभा को मंच प्रदान करने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास, सृजनशीलता, तर्कशक्ति और अभिव्यक्ति कौशल का विकास करती हैं।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर हिंदी पखवाड़े को सार्थक बनाया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की विविध सांस्कृतिक धाराओं को जोड़ने वाली सशक्त कड़ी है।

