संवाददाता: आकाश मिश्रा | हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित जिला सरकारी अस्पताल, मेला अस्पताल में मरीजों को इलाज के दौरान परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि डॉक्टर को दिखाने के बाद जब मरीजों को विभिन्न जांच कराने के लिए भेजा जाता है, तो जांच के दौरान उनसे पैसे की मांग की जाती है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय स्तर पर सामने आई शिकायतों के अनुसार, सरकारी अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले गरीब और जरूरतमंद मरीजों को जांच के लिए पैसे देने की परेशानी झेलनी पड़ रही है। आर्थिक तंगी के कारण कुछ मरीज आवश्यक जांच नहीं करा पाते, जिससे उनका इलाज प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
गर्भवती महिलाओं को भी हो रही परेशानी
अस्पताल में इलाज कराने पहुंचने वाली गर्भवती महिलाओं को भी जांच और उपचार के दौरान कठिनाइयों का सामना करना पड़ने की बात सामने आई है। गर्भावस्था के दौरान समय पर जांच और उचित चिकित्सा सुविधा मिलना बेहद जरूरी होता है। ऐसे में यदि किसी महिला को आर्थिक कारणों से आवश्यक जांच कराने में परेशानी होती है, तो उसकी चिंता और बढ़ जाती है।
सरकारी अस्पताल में सुविधाओं को लेकर उठे सवाल
सरकारी अस्पतालों का उद्देश्य आम जनता, विशेषकर गरीब और जरूरतमंद लोगों को सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि मरीजों से सरकारी जांच के नाम पर अनुचित रूप से पैसे मांगे जा रहे हैं, तो यह गंभीर जांच का विषय है।
मरीजों और उनके परिजनों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित जांचें निःशुल्क हैं या उनके लिए निर्धारित शुल्क लागू है। यदि किसी कर्मचारी द्वारा नियमों के विरुद्ध पैसे मांगे जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों को उचित कार्रवाई करनी चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग से कार्रवाई की मांग
इस मामले में स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन से मांग है कि मरीजों की शिकायतों पर गंभीरता से संज्ञान लिया जाए। अस्पताल में उपलब्ध निःशुल्क जांचों की सूची और निर्धारित शुल्क को सार्वजनिक स्थानों पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाए, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा या आर्थिक शोषण का सामना न करना पड़े।
अब सवाल यह है कि क्या अस्पताल प्रशासन इन शिकायतों की जांच कर गरीब मरीजों और गर्भवती महिलाओं को राहत दिलाएगा?
नोट: पैसे मांगने से संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने आना अभी आवश्यक है।

