पटना। राज्य में वित्तीय प्रबंधन को लेकर सियासत तेज हो गई है। राजद नेता तेजस्वी यादव ने NDA सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार वित्तीय संकट से जूझ रही है।
इसी कारण हाल के दिनों में दोबारा निधि निकासी एवं व्यय नियंत्रण से जुड़े निर्देश जारी किए गए हैं। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले महज 30 दिनों में करीब 41,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
धन की कमी के कारण पेंशन भी बंद
इसके चलते अब कई योजनाओं के लिए धन की कमी देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि सामाजिक पेंशन, छात्रवृत्ति, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड और कर्मचारियों के वेतन-पेंशन भुगतान में देरी की शिकायतें सामने आ रही हैं।
उन्होंने राज्य के बढ़ते कर्ज को लेकर भी चिंता जताई। उनके मुताबिक, बिहार पर कुल कर्ज का बोझ करीब 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।
उन्होंने आरोप लगाया कि तंत्र-यंत्र और षड्यंत्र से बनी जुगाडू सरकार अब ब्याज पर उधार लेकर यानि कर्ज के सहारे चल रही है। सरकार को रोजाना 100 करोड़ रुपये से ज्यादा केवल ब्याज भुगतान पर खर्च करना पड़ रहा है।
कहां हुए खर्च, यह भी नहीं बता रही सरकार
इसके अलावा, उन्होंने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि करीब 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च का उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) अब तक जमा नहीं किया गया है।
खर्च को लेकर उठाए सवाल
मतलब खर्च तो हुए, लेकिन NDA नेताओं और अधिकारियों की जेब भरने में या NDA सिंडिकेट में बंदरबांट करने में किस मद में ये धनराशि लूटी गई सरकार को पता ही नहीं है।
वहीं, उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि 92,132 करोड़ रुपये की राशि के उपयोग को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है कि वह कहां खर्च की गई।

