नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में तेजी ने इस आशंका को और मजबूत कर दिया है।
Highlights
- पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत
- कच्चा तेल 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा
- सरकार को कीमत स्थिर रखने में हो रहा नुकसान
- पेट्रोल पर ₹20 और डीजल पर ₹10 प्रति लीटर तक नुकसान
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें 110 डॉलर से ऊपर बरकरार
- मिडिल ईस्ट तनाव और सप्लाई पर असर
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, बढ़ा दबाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है। इस सप्ताह के अंत में यह कीमत करीब 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो पिछले चार वर्षों का उच्चतम स्तर है। हालांकि बाद में इसमें थोड़ी गिरावट आई, लेकिन कीमतें अभी भी 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं।
सरकार ने बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया
क्या बोले सरकारी सूत्र
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में निकट भविष्य में बढ़ोतरी की संभावना को पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता। यह संकेत दर्शाता है कि सरकार जल्द ही कीमतों में बदलाव कर सकती है।
नुकसान का बढ़ता बोझ
तेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार:
- पेट्रोल पर लगभग ₹20 प्रति लीटर का नुकसान
- डीजल पर करीब ₹10 प्रति लीटर का नुकसान
इस स्थिति में कीमतों को लंबे समय तक स्थिर रखना मुश्किल हो सकता है।

भारत में मौजूदा पेट्रोल-डीजल के दाम
फिलहाल राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ईंधन के दाम इस प्रकार हैं:
- पेट्रोल: ₹94.77 प्रति लीटर
- डीजल: ₹87.67 प्रति लीटर
इसके बावजूद, अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों के कारण घरेलू बाजार पर दबाव लगातार बना हुआ है।
विशेषज्ञों का अनुमान—कीमतें बढ़ सकती हैं
विशेषज्ञों ने पहले ही संकेत दिया था कि चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में प्रति लीटर ₹25 से ₹28 तक की बढ़ोतरी हो सकती है। अब सरकारी संकेतों के बाद यह संभावना और प्रबल हो गई है।
मिडिल ईस्ट संकट का असर
अमेरिका-ईरान तनाव
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव ने वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित किया है।
हार्मुज जलडमरूमध्य पर असर
हार्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर पाबंदी से तेल सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे कीमतों में तेजी आई है।
अन्य ईंधन पहले ही हो चुके महंगे
सरकारी तेल कंपनियां पहले ही कुछ अन्य ईंधनों की कीमतें बढ़ा चुकी हैं:
- कमर्शियल एलपीजी
- औद्योगिक डीजल
- जेट फ्यूल
हालांकि, आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतें अभी तक स्थिर रखी गई हैं।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर सरकार का रुख अब पहले से ज्यादा स्पष्ट होता जा रहा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव के चलते ईंधन दरों में बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा रही है। इसका सीधा असर आम जनता की जेब और महंगाई पर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में सरकार का अंतिम फैसला देश की आर्थिक स्थिति पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालेगा।

