देहरादून के छात्रों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के बीटेक (कंप्यूटर साइंस) के छात्रों ने ‘त्रिनेत्र’ नाम का एक ऐसा नेविगेशन डिवाइस विकसित किया है, जो बिना GPS के भी सटीक रास्ता बता सकता है।
इस अनोखे इनोवेशन को अब पेटेंट भी मिल चुका है, जो इसे और खास बनाता है।
क्या है ‘त्रिनेत्र’ नेविगेशन डिवाइस?
‘त्रिनेत्र’ एक मल्टी-सेंसर काग्निटिव नेविगेशन डिवाइस है, जिसे खासतौर पर उन जगहों के लिए डिजाइन किया गया है जहां GPS सिग्नल काम नहीं करते या कमजोर होते हैं।
आज के समय में अधिकांश नेविगेशन सिस्टम GPS पर निर्भर हैं, लेकिन ‘त्रिनेत्र’ इस निर्भरता को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
AI और सैटेलाइट सिग्नल्स का स्मार्ट इस्तेमाल
इस डिवाइस की सबसे बड़ी खासियत इसकी उन्नत तकनीक है।
- यह लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट सिग्नल्स-ऑफ-ऑपर्च्युनिटी का उपयोग करता है
- इसमें AI आधारित काग्निटिव प्रोसेसिंग सिस्टम लगाया गया है
- यह उपलब्ध सिग्नल्स में से सबसे बेहतर सिग्नल चुनता है
यानी जहां GPS फेल हो जाता है, वहां ‘त्रिनेत्र’ काम करना जारी रखता है।
सब-मीटर सटीकता और मजबूत परफॉर्मेंस
‘त्रिनेत्र’ डिवाइस की एक और बड़ी खासियत इसकी सटीकता है।
- मल्टी-सेंसर फ्यूजन तकनीक के जरिए
👉 यह सब-मीटर लेवल तक लोकेशन की सटीक जानकारी देता है
इसके अलावा:
- जैमिंग (Jamming) से प्रभावित नहीं होता
- स्पूफिंग (Spoofing) को भी पहचान सकता है
यानी सुरक्षा और विश्वसनीयता दोनों मामलों में यह डिवाइस काफी मजबूत है।
कॉम्पैक्ट और यूजर-फ्रेंडली डिजाइन
‘त्रिनेत्र’ को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसे आसानी से कहीं भी इस्तेमाल किया जा सके।
- हैंडहेल्ड (हाथ में पकड़ने योग्य)
- कॉम्पैक्ट साइज
- ऊर्जा-कुशल (Energy Efficient)
ये सभी फीचर्स इसे आम यूजर्स से लेकर सुरक्षा एजेंसियों तक के लिए उपयोगी बनाते हैं।
किसने किया विकास?
इस प्रोजेक्ट का मार्गदर्शन
क्षितिज जैन ने किया।
वहीं, इस शानदार टीम में शामिल छात्र हैं:
- साक्षी कुमारी
- अंकित राज
- अमन भारद्वाज
- शिवम राज
- शिवम कुमार
इन सभी छात्रों ने मिलकर इस इनोवेशन को हकीकत में बदला।
स्मार्ट इंडिया हैकथॉन से शुरू हुई यात्रा
‘त्रिनेत्र’ का विकास स्मार्ट इंडिया हैकथॉन 2025 के तहत किया गया था। यह प्लेटफॉर्म देशभर के युवाओं को अपनी तकनीकी प्रतिभा दिखाने का मौका देता है, और ‘त्रिनेत्र’ इसका बेहतरीन उदाहरण है।
भविष्य में कहां हो सकता है उपयोग?
इस डिवाइस का उपयोग कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जा सकता है:
- रक्षा और सैन्य ऑपरेशन
- आपदा प्रबंधन (Disaster Management)
- जंगल या पहाड़ी इलाकों में नेविगेशन
- अंडरग्राउंड या टनल सिस्टम
जहां GPS काम नहीं करता, वहां ‘त्रिनेत्र’ गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
संस्थान ने जताई खुशी
कॉलेज प्रशासन ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह सफलता छात्रों की तकनीकी क्षमता और नवाचार सोच का प्रमाण है। साथ ही यह भी उम्मीद जताई गई कि यह तकनीक भविष्य में नेविगेशन सिस्टम को नई दिशा देगी।
‘त्रिनेत्र’ सिर्फ एक डिवाइस नहीं, बल्कि एक नई सोच है—जहां तकनीक सीमाओं को तोड़कर आगे बढ़ती है। देहरादून के इन छात्रों ने दिखा दिया कि अगर आइडिया मजबूत हो, तो संसाधनों की कमी भी रास्ता नहीं रोक सकती। आने वाले समय में यह इनोवेशन भारत को नेविगेशन टेक्नोलॉजी में एक नई पहचान दिला सकता है।

