पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार को बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। राज्य विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद राज्यपाल आर.एन. रवि ने विधानसभा और कैबिनेट को भंग करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया। इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी अब संवैधानिक रूप से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री नहीं रहीं।
राज्यपाल ने अनुच्छेद 174 के तहत लिया फैसला
राजभवन की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत विधानसभा को भंग किया गया है। यह आदेश 7 मई 2026 से प्रभावी माना गया। नोटिफिकेशन पर मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला के हस्ताक्षर बताए गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने के साथ यह कार्रवाई संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा थी।
इस्तीफा नहीं देने पर बढ़ा था विवाद
इससे पहले ममता बनर्जी ने चुनावी हार के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था। उन्होंने चुनाव नतीजों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यह “जनादेश नहीं बल्कि साजिश” का परिणाम है। उनके इस रुख के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा संवैधानिक विवाद खड़ा हो गया था। हालांकि विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने के बाद राज्यपाल ने औपचारिक आदेश जारी कर दिया।
15 साल बाद खत्म हुआ TMC का शासन
ममता बनर्जी साल 2011 में पहली बार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनी थीं। इसके बाद उन्होंने लगातार तीन कार्यकाल पूरे किए। उनके नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने राज्य की राजनीति में लंबा वर्चस्व बनाए रखा। लेकिन 2026 विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन के बाद अब बंगाल में नई राजनीतिक तस्वीर बनती दिख रही है।
बंगाल में नई सरकार गठन की तैयारी
विधानसभा भंग होने के बाद अब राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के अनुसार, विधानसभा चुनाव में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला है और जल्द ही नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान हो सकता है।
राजनीतिक और संवैधानिक बहस के केंद्र में रहा बंगाल
ममता बनर्जी के इस्तीफा नहीं देने के फैसले ने पिछले कुछ दिनों में राष्ट्रीय राजनीति में भी बहस छेड़ दी थी। संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना था कि विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने के बाद सरकार स्वतः समाप्त मानी जाती है, चाहे मुख्यमंत्री इस्तीफा दें या नहीं।
बंगाल की राजनीति में नए दौर की शुरुआत?
राजनीतिक जानकार इसे सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव के तौर पर देख रहे हैं। करीब डेढ़ दशक तक राज्य की राजनीति पर प्रभाव रखने वाली ममता बनर्जी अब विपक्ष की भूमिका में दिखाई दे सकती हैं, जबकि भाजपा पहली बार राज्य की सत्ता संभालने की तैयारी में है।
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