महाराष्ट्र के चर्चित नासिक TCS धर्मांतरण और यौन शोषण मामले में मुख्य आरोपी निदा खान की गिरफ्तारी के बाद जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। करीब 40 दिनों तक फरार रहने के बाद पकड़ी गई निदा खान को लेकर अब ऐसे खुलासे सामने आ रहे हैं, जिन्होंने राजनीतिक हलकों में भी हलचल बढ़ा दी है।
पुलिस जांच में दावा किया गया है कि फरारी के दौरान उसे छत्रपति संभाजीनगर में छिपाने और सुरक्षित ठिकाना दिलाने में AIMIM (एमआईएम) के एक पार्षद की कथित भूमिका सामने आई है।
MIM पार्षद मतीन पटेल का नाम आया सामने
जांच एजेंसियों के मुताबिक, एमआईएम पार्षद मतीन पटेल पर आरोप है कि उन्होंने फरार चल रही निदा खान को पनाह देने में मदद की। इसी मामले में नासिक पुलिस ने मतीन पटेल को नोटिस जारी किया है और उनका मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया है।
मोबाइल डेटा की हो रही जांच
पुलिस अब मोबाइल से जुड़े कई तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है, जिनमें शामिल हैं:
- कॉल रिकॉर्ड
- लोकेशन डेटा
- चैट हिस्ट्री
- संपर्क सूची
- डिजिटल लेन-देन
जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि इन जानकारियों से फरारी के दौरान निदा खान की गतिविधियों और संपर्कों का पूरा नेटवर्क सामने आ सकता है।
लगातार बदल रही थी ठिकाना
पुलिस के अनुसार गिरफ्तारी से बचने के लिए निदा खान लगातार अपना लोकेशन बदल रही थी। इसी दौरान उसे छत्रपति संभाजीनगर में एक सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि फरारी के दौरान स्थानीय स्तर पर कई लोगों की मदद ली गई थी। पुलिस अब उन सभी लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
आर्थिक लेन-देन की भी जांच
सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियों को कुछ ऐसे सुराग भी मिले हैं जो संभावित आर्थिक मदद की ओर इशारा कर रहे हैं।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि:
- फरारी के दौरान खर्च कौन उठा रहा था
- ठहरने की व्यवस्था किसने कराई
- आरोपी किन-किन लोगों के संपर्क में थी
- क्या किसी संगठित नेटवर्क की मदद ली गई थी
फॉरेंसिक जांच के बाद और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
क्या है पूरा TCS मामला?
नासिक का यह मामला धर्मांतरण और कथित यौन शोषण के आरोपों को लेकर चर्चा में आया था। मामले में मुख्य आरोपी निदा खान के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए गए थे, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। गिरफ्तारी से पहले वह करीब 40 दिनों तक फरार बताई जा रही थी।
राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल
मामले में AIMIM पार्षद का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। विपक्षी दलों ने मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है। साथ ही फरार आरोपी को संरक्षण देने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग भी उठने लगी है।
फरारी में मदद करने वालों पर भी होगी कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि निदा खान की मदद करने वाले सभी लोगों की पहचान की जा रही है। अगर जांच में किसी की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जांच के अगले चरण पर सबकी नजर
अब इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा नजर मोबाइल फॉरेंसिक जांच और डिजिटल सबूतों पर टिकी हुई है। पुलिस को उम्मीद है कि चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और लोकेशन ट्रैकिंग से फरारी के पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है फिलहाल यह मामला सिर्फ एक आपराधिक जांच नहीं बल्कि राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय भी बनता जा रहा है।
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