हरियाणा सरकार ने कर्मचारियों और श्रमिकों से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी शुरू कर दी है। राज्य सरकार ने ‘कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी (हरियाणा) रूल्स 2026’ का ड्राफ्ट जारी कर दिया है, जिसमें ग्रेच्युटी, पंजीकरण, मातृत्व लाभ और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं।
सबसे बड़ा बदलाव फिक्स्ड टर्म यानी निश्चित अवधि के कर्मचारियों को लेकर किया गया है। अब ऐसे कर्मचारी भी ग्रेच्युटी पाने के हकदार होंगे, जिन्होंने कम से कम एक वर्ष की सेवा पूरी कर ली हो।
अब फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को भी मिलेगी ग्रेच्युटी
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, निश्चित अवधि के अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारियों को भी ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा।
कौन होते हैं फिक्स्ड टर्म कर्मचारी?
ऐसे कर्मचारी जिन्हें:
- तय समय सीमा वाले कॉन्ट्रैक्ट पर रखा जाता है
या - किसी विशेष प्रोजेक्ट के पूरा होने तक नियुक्त किया जाता है
उन्हें फिक्स्ड टर्म कर्मचारी माना जाता है।
एक साल की नौकरी पूरी करना जरूरी
नए नियमों के मुताबिक, अगर कर्मचारी ने कम से कम एक साल तक सेवा दी है तो वह ग्रेच्युटी पाने का पात्र होगा। इसके अलावा छह महीने से ज्यादा अतिरिक्त सेवा को एक अतिरिक्त वर्ष माना जाएगा।
ग्रेच्युटी प्रक्रिया होगी पूरी तरह डिजिटल
हरियाणा सरकार ग्रेच्युटी भुगतान की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन करने जा रही है।
ड्राफ्ट के अनुसार:
- कर्मचारी
- नामित व्यक्ति
- कानूनी वारिस
ऑनलाइन या स्पीड पोस्ट के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे।
30 दिन के भीतर करना होगा आवेदन
ग्रेच्युटी देय होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर आवेदन करना अनिवार्य होगा।
ये सुविधाएं वेतन का हिस्सा नहीं मानी जाएंगी
सरकार ने साफ किया है कि कुछ सुविधाओं को वेतन में शामिल नहीं माना जाएगा। इनमें शामिल हैं:
- मेडिकल खर्च प्रतिपूर्ति
- स्टॉक ऑप्शन
- क्रेच अलाउंस
- इंटरनेट और टेलीफोन रीइंबर्समेंट
- मील वाउचर
इसका असर ग्रेच्युटी और अन्य वेतन आधारित गणनाओं पर पड़ सकता है।
45 दिन में मांगे गए सुझाव और आपत्तियां
हरियाणा श्रम विभाग ने ड्राफ्ट नियम जारी करते हुए सभी पक्षों से 45 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।सरकार ने कहा है कि सुझाव:
- लेबर कमिश्नर हरियाणा
या - ई-मेल के जरिए haryanassrules@gmail.com पर भेजे जा सकते हैं।
कई पुराने श्रम कानून खत्म होंगे
नए सोशल सिक्योरिटी कोड लागू होने के बाद राज्य में कई पुराने नियम समाप्त कर दिए जाएंगे। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- हरियाणा मैटरनिटी बेनिफिट रूल्स 1967
- हरियाणा पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी रूल्स 1972
- हरियाणा अनऑर्गेनाइज्ड वर्कर्स सोशल सिक्योरिटी रूल्स 2010
- पंजाब एंप्लाइज इंश्योरेंस कोर्ट रूल्स 1951
- रोजगार रिक्तियों की अनिवार्य सूचना नियम 1960
- भवन एवं अन्य निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड नियम 2005
औद्योगिक प्रतिष्ठानों का रजिस्ट्रेशन अब ऑनलाइन
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार अब सभी औद्योगिक प्रतिष्ठानों और संस्थानों का पंजीकरण श्रम विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर होगा।
7 दिन में मिलेगा सर्टिफिकेट
यदि आवेदन पूरा है तो:
- 7 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी करना होगा
- ऐसा नहीं होने पर आवेदन स्वतः स्वीकृत माना जाएगा
24 महीने तक रिपोर्ट नहीं दी तो रजिस्ट्रेशन खत्म
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर कोई संस्थान 24 महीने तक अनुपालन रिपोर्ट जमा नहीं करता है तो उसका रजिस्ट्रेशन स्वतः समाप्त माना जाएगा।
मातृत्व लाभ मामलों में भी बड़ा बदलाव
ड्राफ्ट नियमों के तहत मातृत्व लाभ से जुड़े मामलों की अपील अब संबंधित डिप्टी लेबर कमिश्नर (DLC) के पास की जा सकेगी। इसके अलावा महिला कर्मचारियों का विस्तृत रिकॉर्ड रखने के लिए नियोक्ताओं को ‘फॉर्म 20’ में विशेष रजिस्टर तैयार करना होगा।
इसमें क्या-क्या दर्ज होगा?
- नियुक्ति विवरण
- कार्य की प्रकृति
- गर्भावस्था सूचना
- मातृत्व लाभ भुगतान
- मेडिकल अवकाश
मृत्यु पर अंतिम संस्कार के लिए 20 हजार रुपये का प्रावधान
नए ड्राफ्ट में कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में अंतिम संस्कार खर्च के तौर पर न्यूनतम 20 हजार रुपये जमा करवाने का भी प्रस्ताव है। सरकार भविष्य में इस राशि को बढ़ा भी सकती है।
कंपनियों के लिए रिकॉर्ड रखना अनिवार्य
नियोक्ताओं को अब:
- हाजिरी
- वेतन
- ओवरटाइम
- कटौती
से जुड़े रिकॉर्ड हिंदी या अंग्रेजी में इलेक्ट्रॉनिक रूप से रखने होंगे। इन रिकॉर्ड्स को कम से कम 5 कैलेंडर वर्षों तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा।
क्या बदलेगा कर्मचारियों के लिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल सिक्योरिटी कोड-2026 लागू होने के बाद:
- श्रमिकों को ज्यादा पारदर्शिता मिलेगी
- ऑनलाइन प्रक्रिया से भ्रष्टाचार कम हो सकता है
- फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी
- कंपनियों के लिए डिजिटल अनुपालन जरूरी होगा
हरियाणा सरकार का यह कदम राज्य में श्रम सुधारों की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

