फरीदाबाद, हरियाणा। फरीदाबाद में बुधवार को जन संघर्ष समिति के नेतृत्व में मजदूरों की विभिन्न समस्याओं को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन फरीदाबाद डीसी को सौंपा जाना था, लेकिन उनकी अनुपस्थिति में ज्ञापन तहसीलदार को दिया गया।
प्रदर्शन में शामिल नेताओं और सामाजिक संगठनों ने मजदूरों की मांगों को पूरी तरह जायज बताते हुए सरकार से जल्द समाधान की मांग की। वासी प्रवासी संगठन के नेता संतोष यादव ने कहा कि प्रदेश में मजदूरों का लगातार शोषण हो रहा है और सरकार को मजदूर हित में ठोस कदम उठाने चाहिए।

ज्ञापन में रखी गई प्रमुख मांगें
जन संघर्ष समिति द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कई अहम मांगें शामिल थीं। इनमें हरियाणा सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम मजदूरी को सभी कंपनियों में सख्ती से लागू करने, गिरफ्तार मजदूरों और मजदूर कार्यकर्ताओं को बिना शर्त रिहा करने तथा उन पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग प्रमुख रही।
इसके अलावा कालका स्टील कंपनी में हुए भीषण अग्निकांड में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिवारों को 30 लाख रुपये मुआवजा और अन्य सुविधाएं देने की मांग भी उठाई गई।

संगठन ने ठेकेदारी प्रथा समाप्त करने और 8 घंटे काम के लिए न्यूनतम ₹30,000 वेतन लागू करने की भी मांग की।
“मजदूरों की आवाज दबाना बंद करे सरकार”
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश में मजदूरों के अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि मजदूरों की आवाज दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए।

वक्ताओं ने कहा कि यदि मजदूरों की मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
कई संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता रहे मौजूद
प्रदर्शन में भोजपुरी अवधी समाज के रघुवर दयाल, इंकलाबी मजदूर केंद्र के संजय मौर्या, आम आदमी पार्टी हरियाणा के प्रदेश सह सचिव भीम यादव, कांग्रेस हरियाणा के प्रवक्ता सुमित गौड़, भारतीय मजदूर संघ के शैलेश चौधरी, पूर्वांचल विकास परिषद के सुदेश यादव, वासी प्रवासी संगठन के संतोष यादव, हिंद मजदूर सभा के आरडी यादव और एटक के मिथिलेश मौर्या सहित कई संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
इसके अलावा महिला संगठन की रंजना और पूर्णिमा, सामाजिक कार्यकर्ता रामफल जाखड़, बृजकिशोर झा, मनोहर विरयानी समेत सैकड़ों मजदूर और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन में भाग लिया।


