West Bengal में सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक माहौल लगातार गरमाया हुआ है। नई भाजपा सरकार की कथित बुलडोजर कार्रवाई और चुनाव बाद हिंसा के विरोध में All India Trinamool Congress ने विधानसभा परिसर में बड़ा धरना आयोजित किया, लेकिन इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में विधायकों की गैरहाजिरी ने पार्टी की अंदरूनी स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। धरने में 80 में से केवल 34 विधायक पहुंचे, जबकि 46 विधायक अनुपस्थित रहे। इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
Highlights
- बंगाल विधानसभा परिसर में TMC का विरोध प्रदर्शन
- 80 में से 46 विधायक धरने से रहे नदारद
- केवल 34 विधायक ही पहुंचे प्रदर्शन में
- धरना करीब आधे घंटे में समाप्त हुआ
- ममता बनर्जी की बैठक से भी पहले 15 विधायक गायब रहे
- अभिषेक बनर्जी के समर्थन में नारे नहीं लगे
- राजनीतिक विश्लेषकों ने पार्टी में अंदरूनी खींचतान के संकेत बताए
भाजपा सरकार के खिलाफ TMC का प्रदर्शन
All India Trinamool Congress ने बुधवार को बंगाल विधानसभा परिसर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के सामने धरना प्रदर्शन किया। पार्टी ने आरोप लगाया कि नई भाजपा सरकार चुनाव बाद राजनीतिक हिंसा, बुलडोजर कार्रवाई और रेलवे स्टेशनों के आसपास फेरीवालों को हटाने जैसे कदम उठा रही है। धरने में कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे, जिनमें शोभनदेव चट्टोपाध्याय, फिरहाद हकीम और कुणाल घोष शामिल थे।

46 विधायकों की गैरहाजिरी से उठे सवाल
धरना शुरू होने के समय केवल 31 विधायक मौजूद थे। बाद में तीन और विधायक पहुंचे, जिससे कुल संख्या 34 तक पहुंच सकी। 80 सदस्यीय विधायक दल में से 46 विधायकों का अनुपस्थित रहना पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े कर रहा है। विपक्ष में बैठने के बाद यह तृणमूल का पहला बड़ा विरोध प्रदर्शन था, लेकिन कम उपस्थिति के कारण यह राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।
आधे घंटे में खत्म हुआ धरना
कम उपस्थिति के बीच धरना ज्यादा देर नहीं चल सका और करीब आधे घंटे में समाप्त हो गया। धरना स्थल पर “ममता बनर्जी जिंदाबाद” और “तृणमूल जिंदाबाद” के नारे लगाए गए, लेकिन “अभिषेक बनर्जी जिंदाबाद” के नारे नहीं सुनाई दिए। राजनीतिक विश्लेषक इसे पार्टी के भीतर बदलते समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं।
कुणाल घोष ने दी सफाई
विधायकों की अनुपस्थिति पर पार्टी प्रवक्ता Kunal Ghosh ने कहा कि चुनाव बाद कई इलाकों में पार्टी कार्यकर्ताओं पर हमले हुए हैं। उनके अनुसार, कई विधायक अपने क्षेत्रों में स्थिति संभालने में व्यस्त थे, जबकि कुछ नेता फैक्ट फाइंडिंग टीमों के साथ जिलों के दौरे पर थे। हालांकि, विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर बढ़ती बेचैनी और हालिया पुलिस कार्रवाइयों का असर भी इस गैरहाजिरी में दिखाई दे रहा है।

सत्ता परिवर्तन के बाद बढ़ा दबाव
राज्य में नई सरकार बनने के बाद कई तृणमूल नेताओं पर कथित वसूली, सिंडिकेट राज और आर्थिक अनियमितताओं के मामलों में कार्रवाई तेज हुई है। हाल के दिनों में कई नेताओं से पूछताछ और गिरफ्तारियों ने पार्टी के अंदर दबाव बढ़ा दिया है। ऐसे में विधायकों की कम मौजूदगी को केवल व्यस्तता नहीं, बल्कि संगठनात्मक चुनौती के रूप में भी देखा जा रहा है। बंगाल विधानसभा में आयोजित TMC का यह धरना राजनीतिक रूप से उतना प्रभावी नहीं दिखा, जितनी पार्टी को उम्मीद थी। बड़ी संख्या में विधायकों की गैरमौजूदगी ने ममता बनर्जी की रणनीति और संगठन की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले समय में विपक्ष की भूमिका निभाने के दौरान तृणमूल कांग्रेस को अपनी अंदरूनी एकजुटता बनाए रखना बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
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