लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल कराने और इसे पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग कर रहे प्रसिद्ध पर्यावरणविद और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने एक बार फिर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। लेह में पिछले साल हुई हिंसा की पहली बरसी के मौके पर लोगों को संबोधित करते हुए वांगचुक ने अपने एनकाउंटर की बड़ी आशंका जताई है।
उन्होंने दावा किया कि कई कानूनी और सुरक्षा विशेषज्ञों ने उन्हें सतर्क किया है कि उनके साथ कोई अनहोनी हो सकती है, लेकिन वह लद्दाख के हक की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे।
‘जेल भेज चुके हैं, अब बस फर्जी एनकाउंटर बाकी’
सोनम वांगचुक ने कहा कि सरकार लगातार उनके आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है। अपनी जान को खतरे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश की खातिर वे हर कीमत चुकाने को तैयार हैं।
“मुझे पता है कि इस भाषण के बाद मेरे खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। वे मुझे पहले भी जेल में डाल चुके हैं। अब उनके पास सिर्फ एनकाउंटर का ही रास्ता बचा है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि मेरा एनकाउंटर हो सकता है—मैं कहता हूँ कि होने दो, ताकि कम से कम इस देश के लोगों की आत्मा तो जागे।” — सोनम वांगचुक, पर्यावरणविद
लेह हिंसा को बताया सुनियोजित, गृह मंत्री से मांगा इस्तीफा
24 सितंबर 2025 को लेह में हुए बवाल और पुलिस फायरिंग का जिक्र करते हुए वांगचुक ने आरोप लगाया कि वह हिंसा कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी।
- 4 मौतों की जिम्मेदारी का मुद्दा: वांगचुक ने कहा कि उस दौरान सुरक्षा बलों की गोलीबारी में चार निर्दोष लद्दाखियों की जान चली गई थी, जिनमें एक पूर्व सैनिक (वॉर हीरो) भी शामिल थे।
- अमित शाह पर निशाना: उन्होंने कहा कि लद्दाख में शांति भंग करने और सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की नाकाम कोशिश हुई। इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
- जांच रिपोर्ट हो सार्वजनिक: उन्होंने सरकार से मांग की कि हिंसा की जांच रिपोर्ट को तुरंत सार्वजनिक किया जाए ताकि पूरी सच्चाई दुनिया के सामने आ सके।
वादों से पीछे हटने का आरोप
सोनम वांगचुक ने सीधे तौर पर दिल्ली (केंद्र सरकार) को लद्दाख के बिगड़े हालातों के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले भाजपा और केंद्र सरकार ने लद्दाख के प्रतिनिधियों से 6th Schedule (छठी अनुसूची) लागू करने का वादा किया था।
लेकिन बाद में गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट रूप से लद्दाख को संवैधानिक सुरक्षा देने से इनकार कर दिया। वांगचुक ने दोहराया कि जब तक लद्दाख के जल, जंगल, जमीन और संस्कृति को सुरक्षा नहीं मिलती, तब तक उनका यह अहिंसक आंदोलन जारी रहेगा।
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