फरीदाबाद, हरियाणा। श्री विजय रामलीला कमेटी, मार्केट नंबर-1, एनआईटी फरीदाबाद के स्वर्णिम मंच पर भगवान श्रीराम के वनवास का मार्मिक प्रसंग प्रस्तुत किया गया। कैकेयी-मंथरा के संवाद, महाराज दशरथ के विलाप और भगवान श्रीराम के वनवास की घोषणा ने रामलीला देखने पहुंचे दर्शकों को भावुक कर दिया।
नारद मुनि ने श्रीराम को उनके उद्देश्य का कराया स्मरण
रामलीला के पहले दृश्य में देवताओं के आग्रह पर नारद मुनि के रूप में कमल शर्मा मंच पर पहुंचे। उन्होंने भगवान श्रीराम की भूमिका निभा रहे निशांत नागपाल को उनके अवतार के उद्देश्य और राक्षसों के अंत के लिए तैयार होने का स्मरण कराया। इस दृश्य ने आगे होने वाली घटनाओं की भूमिका तैयार की।
मंथरा ने कैकेयी के मन में भरा भ्रम
अगले दृश्य में मंथरा की भूमिका में आशीष भाटिया ने अपने अभिनय से कैकेयी के मन को प्रभावित करने का प्रसंग जीवंत किया। मंथरा ने कैकेयी को समझाया कि यदि श्रीराम अयोध्या के राजा बन गए, तो भरत के भविष्य पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।

मंथरा की बातों में आकर कैकेयी की सोच बदल गई। उन्होंने भरत को अयोध्या का राजसिंहासन दिलाने और भगवान श्रीराम को चौदह वर्ष का वनवास दिलाने का संकल्प ले लिया। इस घटनाक्रम ने मंच पर नाटकीय तनाव पैदा कर दिया।
कैकेयी के दो वरदानों ने तोड़ दिया महाराज दशरथ का हृदय
रामलीला के सबसे भावुक दृश्य में कमेटी के मीडिया प्रभारी कमल सलूजा ने महाराज दशरथ की भूमिका निभाई। कैकेयी की भूमिका में रमेश नागपाल ने अपने अभिनय से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
जब कैकेयी ने महाराज दशरथ से अपने दो वरदान मांगे—पहला, भरत को अयोध्या का राजा बनाया जाए और दूसरा, भगवान श्रीराम को चौदह वर्ष का वनवास दिया जाए—तो महाराज दशरथ गहरे दुख में डूब गए।



अपने प्रिय पुत्र श्रीराम से बिछड़ने की कल्पना मात्र से व्याकुल महाराज दशरथ का विलाप देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं। कलाकारों के प्रभावशाली संवाद और भावपूर्ण अभिनय ने इस पौराणिक प्रसंग को जीवंत बना दिया।
आज होगा श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वन गमन का मंचन
श्री विजय रामलीला कमेटी के ऐतिहासिक मंच पर आज भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वन गमन का मार्मिक प्रसंग प्रस्तुत किया जाएगा। इस मंचन में त्याग, कर्तव्य, पारिवारिक संबंधों और मर्यादा की भावना को दर्शाया जाएगा।
रामलीला के माध्यम से कमेटी भारतीय संस्कृति और पौराणिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के साथ दर्शकों को भगवान श्रीराम के आदर्शों, त्याग और मर्यादा का संदेश दे रही है।

