नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष और Strait of Hormuz के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल का व्यापार इसी जलडमरूमध्य से होता है। मिसाइल हमलों, समुद्री नाकेबंदी और जहाजों पर बढ़ते खतरे के बीच कई देशों की तेल आपूर्ति प्रभावित हुई, लेकिन India ने अपनी आयात रणनीति में बड़े बदलाव कर हालात को काफी हद तक नियंत्रित रखा। भारत, जो अपनी लगभग 90 प्रतिशत तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, ने रूस, अमेरिका, ब्राजील, वेनेजुएला और पश्चिम अफ्रीका जैसे वैकल्पिक स्रोतों से सप्लाई बढ़ाकर ऊर्जा संकट से निपटने की कोशिश की है।
Highlights
- होर्मुज संकट से वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित
- भारत के पास करीब 60 दिनों का पेट्रोलियम स्टॉक
- रूस बना भारत की तेल सप्लाई की सबसे बड़ी रीढ़
- अमेरिका, ब्राजील और वेनेजुएला से बढ़ी खरीदारी
- सऊदी और UAE ने पाइपलाइन रूट से जारी रखी सप्लाई
- भारत ने पेट्रोल-डीजल कीमतों में 3.90 रुपये प्रति लीटर बढ़ोतरी की
- सरकार ने घरेलू आपूर्ति बनाए रखने के लिए विंडफॉल टैक्स लगाया
होर्मुज बंद होने से क्यों बढ़ा संकट?
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक माना जाता है। मध्य-पूर्व में युद्ध बढ़ने के बाद ईरान की ओर से इस जलमार्ग को बंद कर दिया गया, जिससे कच्चे तेल, LPG और LNG की वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ा। अमेरिका की समुद्री नाकेबंदी, मिसाइल हमलों और जहाजों पर बढ़ते खतरों के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भारी अनिश्चितता पैदा हो गई।
भारत के पास कितना तेल भंडार है?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और अन्य स्टोरेज को मिलाकर भारत के पास करीब 60 दिनों की तेल आपूर्ति उपलब्ध है। हालांकि भारत के रणनीतिक भंडार अमेरिका, जापान या चीन जितने बड़े नहीं हैं, लेकिन विविधीकृत आयात रणनीति और अलग-अलग देशों से सप्लाई बनाए रखने की नीति ने संकट के दौरान राहत दी है।
रूस बना भारत की ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़
2022 के Russia-Ukraine War के बाद से Russia भारत के लिए कच्चे तेल का सबसे बड़ा स्रोत बन चुका है। Kpler के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में भारत का रूसी तेल आयात 1.9 से 2.0 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया। मई में भी यह स्तर लगभग स्थिर बना हुआ है। विशेषज्ञों के मुताबिक, रूस से आने वाला तेल Baltic, Black Sea और Pacific समुद्री मार्गों से आता है, इसलिए यह होर्मुज संकट से प्रभावित नहीं हुआ। भारत ने साफ किया है कि उसका तेल खरीद निर्णय ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों पर आधारित है। Rosneft और Lukoil जैसी कंपनियों से खरीदारी भारत के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद रही है।

भारत ने कैसे बदली आयात रणनीति?
Kpler के मॉडलिंग और रिफाइनिंग विशेषज्ञ सुमित रितोलिया के अनुसार, मार्च 2026 के बाद भारत ने अपनी आयात रणनीति में बड़ा बदलाव किया। होर्मुज मार्ग में बढ़ते जोखिम के कारण भारतीय रिफाइनरों ने मध्य-पूर्व पर निर्भरता कम करते हुए अटलांटिक बेसिन और वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख किया। इराक और खाड़ी देशों से घटती आपूर्ति की भरपाई अमेरिका, ब्राजील, पश्चिम अफ्रीका और वेनेजुएला से बढ़ी खरीदारी के जरिए की गई। रिफाइनर अब उपलब्धता, ढुलाई लागत, रिफाइनरी अनुकूलता और वैश्विक प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए तेल का नया मिश्रण तैयार कर रहे हैं।
सऊदी और UAE ने पाइपलाइन से जारी रखी सप्लाई
Saudi Arabia और United Arab Emirates ने भी वैकल्पिक पाइपलाइन मार्गों के जरिए भारत को तेल सप्लाई जारी रखी। सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और UAE की हबशान-फुजैराह पाइपलाइन के जरिए तेल भेजा जा रहा है। हालांकि इन मार्गों से सप्लाई में 4 से 10 दिन अतिरिक्त लग रहे हैं और ढुलाई लागत भी बढ़ी है।
वेनेजुएला की सप्लाई फिर हुई शुरू
Venezuela से तेल सप्लाई, जो प्रतिबंधों के कारण लगभग बंद हो गई थी, अब फिर तेजी से बढ़ रही है। अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद वेनेजुएला भारत के शीर्ष पांच तेल सप्लायर देशों में शामिल हो गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, वेनेजुएला का भारी ग्रेड तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए उपयोगी साबित हो रहा है।

भारत के सामने क्या हैं चुनौतियां?
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का कुल कच्चा तेल आयात अभी भी सामान्य स्तर से 700-800 हजार बैरल प्रतिदिन कम है। वैश्विक सप्लाई संकट और होर्मुज में रुकावट के कारण एशियाई बाजारों में तेल प्रवाह सीमित बना हुआ है। आने वाले समय में भी रूस भारत की ऊर्जा रणनीति का मुख्य आधार बना रह सकता है।
सरकार ने घरेलू स्तर पर क्या कदम उठाए?
सरकार ने अनावश्यक खपत कम करने और घरेलू आपूर्ति बनाए रखने के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3.90 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की। इसके अलावा रिफाइनरों के निर्यात को सीमित करने और घरेलू बाजार में ईंधन उपलब्धता बनाए रखने के लिए ‘विंडफॉल गेन्स टैक्स’ भी लगाया गया है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक संकट का असर आम उपभोक्ताओं पर कम से कम पड़े। ईरान युद्ध और होर्मुज संकट ने दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति को गंभीर चुनौती दी है, लेकिन भारत ने समय रहते अपनी तेल आयात रणनीति बदलकर हालात को काफी हद तक संभाल लिया है। रूस, अमेरिका, ब्राजील और वेनेजुएला जैसे देशों से सप्लाई बढ़ाने, वैकल्पिक समुद्री और पाइपलाइन मार्गों का इस्तेमाल करने और घरेलू स्तर पर मांग प्रबंधन के जरिए भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने की कोशिश की है।
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