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राष्ट्रीय समाचार

2024 में 54 करोड़ के जाली नोट जब्त, NCRB रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े

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नई दिल्ली। देशभर में अपराध के बदलते स्वरूप को लेकर नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की ताजा रिपोर्ट ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में जहां करोड़ों रुपये के नकली नोट जब्त किए गए, वहीं सीनियर सिटिजन्स के खिलाफ अपराधों में भी तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है।

रिपोर्ट यह संकेत देती है कि देश में पारंपरिक अपराधों के साथ-साथ आर्थिक अपराध और कमजोर वर्गों को निशाना बनाने वाले मामलों में भी बदलाव आ रहा है।

54 करोड़ रुपये के नकली नोट जब्त, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

NCRB के आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 के दौरान देशभर में 8.21 लाख नकली भारतीय करेंसी नोट जब्त किए गए। इनकी कुल कीमत करीब 54.6 करोड़ रुपये बताई गई है।

यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि नकली करेंसी का नेटवर्क अभी भी सक्रिय है और सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल भुगतान के बढ़ते दौर के बावजूद नकली नोटों का कारोबार पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

बुजुर्गों के खिलाफ अपराध में 16.9% की बढ़ोतरी

रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चिंता बढ़ाने वाला आंकड़ा सीनियर सिटिजन्स से जुड़ा है। 2024 में 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के खिलाफ अपराध के 32,602 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2023 में यह संख्या 27,886 थी। यानी एक साल में करीब 16.9% की बढ़ोतरी हुई है।

कौन से अपराध सबसे ज्यादा?

विशेषज्ञों के अनुसार बुजुर्गों के खिलाफ होने वाले अपराधों में शामिल हैं:

  • संपत्ति विवाद
  • घरेलू हिंसा
  • आर्थिक धोखाधड़ी
  • लूटपाट
  • मानसिक प्रताड़ना

बढ़ते शहरीकरण और अकेले रहने वाले बुजुर्गों की संख्या को भी इसका बड़ा कारण माना जा रहा है।

हत्या के मामलों में हल्की कमी, लेकिन निजी दुश्मनी बनी बड़ी वजह

NCRB डेटा के अनुसार, 2024 में हत्या के 27,049 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2023 में यह आंकड़ा 27,721 था। हालांकि कुल मामलों में मामूली गिरावट आई है, लेकिन रिपोर्ट बताती है कि हत्या के पीछे निजी दुश्मनी, आपसी विवाद और फायदे के लिए किए गए अपराध प्रमुख कारण रहे।

शहरों में क्या रहा हाल?

देश के 19 बड़े महानगरों में हत्या के कुल 1,987 मामले दर्ज किए गए।
2023 में यह संख्या 2,004 थी। यानी महानगरों में हत्या के मामलों में 0.8% की कमी दर्ज की गई।

अपहरण के मामलों में बड़ी गिरावट

रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में अपहरण और अगवा करने के 96,079 मामले दर्ज किए गए। यह आंकड़ा 2023 के 1.13 लाख मामलों की तुलना में 15.4% कम है। विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिस निगरानी, टेक्नोलॉजी और ट्रैकिंग सिस्टम मजबूत होने से इस तरह के अपराधों पर कुछ हद तक नियंत्रण देखने को मिला है।

35 लाख से ज्यादा मामले IPC और BNS के तहत दर्ज

2024 में कुल 35.4 लाख मामले इंडियन पीनल कोड (IPC) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दर्ज किए गए। ध्यान देने वाली बात यह है कि 2024 में भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू की गई थी, जिसके बाद कई अपराधों की कानूनी परिभाषाओं और प्रक्रियाओं में बदलाव आया। इसके अलावा 23.4 लाख मामले विशेष और स्थानीय कानूनों के तहत दर्ज किए गए।

महानगरों में अपराध घटा, NCRB ने जारी किया तुलनात्मक डेटा

NCRB ने देश के 19 महानगरों का तुलनात्मक अपराध डेटा भी जारी किया है।

रिपोर्ट के अनुसार:

  • 2024 में 8.4 लाख संज्ञेय अपराध दर्ज हुए
  • 2023 में यह संख्या 9.4 लाख थी
  • यानी अपराधों में 10.9% की गिरावट दर्ज की गई

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल आंकड़ों में कमी को पूरी तरह राहत नहीं माना जा सकता, क्योंकि कई मामलों में रिपोर्टिंग पैटर्न भी बदलते रहते हैं।

विस्फोटक जब्ती में बड़ी गिरावट

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 2024 में सुरक्षा एजेंसियों ने 3.62 लाख किलोग्राम विस्फोटक जब्त किए, जिनमें RDX और TNT जैसे खतरनाक विस्फोटक शामिल थे। वहीं 2023 में यह आंकड़ा 10 लाख किलोग्राम से ज्यादा था।

क्या संकेत देती है यह गिरावट?

विशेषज्ञ इसे दो नजरियों से देख रहे हैं:

  1. अवैध विस्फोटक नेटवर्क कमजोर पड़ा
  2. या फिर तस्करी के तरीके और ज्यादा आधुनिक हो गए

SC/ST के खिलाफ अपराधों में कमी

रिपोर्ट के मुताबिक अनुसूचित जातियों (SC) के खिलाफ अपराधों के 55,698 मामले दर्ज किए गए, जो 2023 के मुकाबले 3.6% कम हैं। वहीं अनुसूचित जनजातियों (ST) के खिलाफ अपराधों के 9,966 मामले दर्ज हुए, जो पिछले साल की तुलना में 23.1% कम हैं।हालांकि सामाजिक संगठनों का कहना है कि केवल आंकड़ों में कमी आना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पीड़ितों को न्याय और सुरक्षा मिलना ज्यादा जरूरी है।

Arms Act मामलों में भी गिरावट

2024 में Arms Act के तहत 63,564 मामले दर्ज किए गए। 2023 में यह संख्या 73,388 थी। यानी हथियारों से जुड़े मामलों में भी गिरावट देखने को मिली है।

क्या कहती है NCRB रिपोर्ट?

NCRB की यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि देश में अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। जहां एक ओर हत्या, अपहरण और Arms Act मामलों में कमी देखने को मिली है, वहीं दूसरी ओर बुजुर्गों के खिलाफ बढ़ते अपराध और नकली करेंसी का नेटवर्क नई चिंता बनकर उभरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में साइबर अपराध, आर्थिक अपराध और संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा देश की कानून व्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनने वाले हैं।

यह भी पढ़ें- फरीदाबाद में 13वीं मंजिल से कूदी महिला, मौके पर मौत; घरेलू विवाद की आशंका

shubhneet chaddha

About Author

By Team Noothanayuga Shubhneet is a news writer at Noothanayuga. He covers breaking news, politics, and trending topics. He has 3+ years of experience in digital journalism.

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