फरीदाबाद। सतयुग दर्शन ट्रस्ट (रजि.) के तत्वावधान में विश्व समभाव दिवस का भव्य एवं प्रेरणादायी आयोजन 7 सितंबर 2026 को सतयुग दर्शन वसुंधरा स्थित सभागार में किया गया। कार्यक्रम में समाज के चारित्रिक उत्थान तथा मानव जीवन को यथार्थता एवं सद्भावना से परिपूर्ण बनाने के लिए भौतिक ज्ञान से अधिक आत्मिक ज्ञान की प्राप्ति को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आत्मिक ज्ञान को जीवन में धारण करने से मनुष्य दुर्जनता का त्याग कर सज्जनता, समभाव और समदृष्टि को अपना सकता है। इसके माध्यम से व्यक्ति अपने विचारों, वचनों और कर्मों में श्रेष्ठता लाते हुए मानवता एवं परमार्थ के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है।
दीप प्रज्ज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ सतयुग दर्शन ट्रस्ट के मार्गदर्शक परम श्रद्धेय श्री सजन जी, सतयुग दर्शन ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी श्रीमती रश्मा गांधी जी, श्रीमती अनुपमा तलवार जी, पद्मश्री डॉ. संत राम देसवाल, पद्मश्री सुमित्रा गुहा जी एवं अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक क्षेत्रों से जुड़े विशिष्ट अतिथियों के साथ विद्यालयों के प्रधानाचार्य, शिक्षक, विद्यार्थी तथा सतयुग दर्शन ट्रस्ट से जुड़े सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
‘मैं ब्रह्म हूं’ के सर्वोच्च सत्य को जीवन में स्वीकारने का आह्वान
सतयुग दर्शन ट्रस्ट के मार्गदर्शक श्री सजन जी ने अपने संबोधन में कहा कि ब्रह्म और ब्रह्मांड के समरूप आदि, अनादि एवं परमादि सत्य को जीवन में विवेकशीलता के साथ स्वीकार करना आवश्यक है। उन्होंने ‘मैं ब्रह्म हूं’ अर्थात अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानने तथा जीवन की प्रत्येक परिस्थिति में इस सर्वोच्च सत्य पर मानसिक रूप से समरूप बने रहने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि निष्काम एवं अकर्ता भाव से वेद-विहित कर्मों का निर्वहन करते हुए मनुष्य यथार्थपूर्ण जीवन जीने तथा निर्विकारिता का प्रतीक बनने में सक्षम हो सकता है। विचार, वचन और कर्म में उत्तमता लाने वाला व्यक्ति ही वास्तविक अर्थों में सज्जन एवं श्रेष्ठता का प्रतीक बन सकता है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दिया समभाव-समदृष्टि का संदेश
कार्यक्रम में अंबाला, फरीदाबाद, गुरुग्राम, दिल्ली, जालंधर, बरेली और वसुंधरा सहित विभिन्न शहरों में संचालित सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्रों से आए बाल एवं युवा कलाकारों तथा विद्यार्थियों ने आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।
कलाकारों ने भरतनाट्यम, सूफी नृत्य, भांगड़ा, माइम सहित विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से ‘समभाव-समदृष्टि’ का संदेश प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। संगीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य पर चिंतन करने के लिए प्रेरित किया।
नृत्य नाटिका में उठाया गया मानव जीवन के उद्देश्य का सवाल
कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत नृत्य नाटिका की शुरुआत एक प्रभावशाली सवाल से हुई— “इंसान इस दुनिया में क्या करने आया है?”
नाटिका के माध्यम से संदेश दिया गया कि मानव जीवन केवल भौतिक उपलब्धियों और सांसारिक सुखों तक सीमित नहीं है। आत्मज्ञान प्राप्त करना, अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानना तथा परमार्थ और मानवता के मार्ग पर आगे बढ़ना मानव जीवन के महत्वपूर्ण उद्देश्यों में शामिल है। प्रस्तुतियों के समापन पर कलाकारों एवं विद्यार्थियों को दर्शकों की ओर से तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उत्साहवर्धन मिला।
विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं का सम्मान
विश्व समभाव दिवस के अवसर पर ‘वैल्यू योर वर्च्युज़ प्रतियोगिता’ के विजेताओं को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही 12वें अंतर्राष्ट्रीय मानवता ओलंपियाड (IHO), ‘स्पिरिचुअल एलॉक्वेंस’ (आध्यात्मिक वाक्पटुता) तथा ‘स्पिरिचुअल इकोस’ (आध्यात्मिक प्रतिध्वनि) कार्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को भी सम्मानित किया गया।
राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख विजेताओं में पुष्प श्रेणी में पश्चिम बंगाल से संचिता साहू, हरियाणा से कुणाल कुमार व अक्षिता शर्मा, दिल्ली से जानवी व सुगम परिहार तथा जम्मू-कश्मीर से अरनवी मिश्रा शामिल रहे।
अंकुर श्रेणी में उत्तराखंड से इशरा अंसारी, चंडीगढ़ से सरयू कोचर, दिल्ली से अनूप कुमार और हरियाणा से जानवी विजेता रहे। वहीं तरुवर श्रेणी में हरियाणा से रीना सैनी तथा दरख्त श्रेणी में हरियाणा से गुजरी भारद्वाज एवं रूद्र शेखर को उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
शिक्षकों और प्रधानाचार्यों की भूमिका को सराहा
समारोह में विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों को भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए बधाई दी गई। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षण संस्थान समर्पित, जागरूक एवं गुणनिष्ठ विद्यार्थियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विद्यार्थियों में मानवीय मूल्यों, सदाचार और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में शिक्षकों का योगदान अहम है।
समभाव-समदृष्टि के निःशुल्क स्कूलों से जुड़ने का आह्वान
कार्यक्रम में लोगों से मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने तथा आत्मिक ज्ञान एवं मानवीय मूल्यों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया गया। इस दौरान बताया गया कि कुदरत द्वारा विभिन्न स्थानों पर समभाव-समदृष्टि के निःशुल्क स्कूल खोले जा रहे हैं, जहां आत्मिक ज्ञान के माध्यम से मानवता, सदाचार एवं परमार्थ के मूल्यों को जीवन में धारण करने की दिशा में मार्गदर्शन दिया जाएगा।
साथ ही लोगों से सतयुग दर्शन ट्रस्ट (रजि.) की गतिविधियों से ऑफलाइन तथा सतयुग दर्शन ट्रस्ट की मोबाइल एप के माध्यम से ऑनलाइन जुड़ने की अपील की गई। एप प्ले स्टोर और ऐप स्टोर पर उपलब्ध होने की जानकारी भी दी गई।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों एवं उपस्थितजनों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया। आयोजकों ने कामना की कि प्रत्येक मानव अपने वास्तविक स्वरूप को पहचाने, समभाव-समदृष्टि को अपने जीवन में धारण करे और मानव जीवन के परम लक्ष्य की ओर अग्रसर हो।

