सत्युग दर्शन इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (SDIET) में 5 सितंबर 2026 को “बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights – IPR)” विषय पर ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में अधिवक्ता डॉ. आलोक गुप्ता ने विशेषज्ञ वक्ता के रूप में प्रतिभागियों को बौद्धिक संपदा अधिकारों की अवधारणा, महत्त्व एवं व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बौद्धिक रचनाओं एवं नवाचारों के संरक्षण के लिए उपयुक्त कानूनी व्यवस्थाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। डॉ. गुप्ता ने पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क तथा डिजाइन सहित बौद्धिक संपदा के विभिन्न रूपों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने शैक्षणिक, अनुसंधान एवं व्यावसायिक क्षेत्रों में इनके महत्त्व को स्पष्ट करते हुए बताया कि बौद्धिक संपदा अधिकार मौलिक विचारों के संरक्षण, नवाचार को प्रोत्साहन तथा अनुसंधान परिणामों के प्रभावी व्यावसायीकरण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर संस्थान के प्राचार्य डॉ शैलेंद्र त्यागी ने कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति जागरूकता आज के शैक्षणिक एवं तकनीकी परिवेश में अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों को अपने मौलिक विचारों, अनुसंधान एवं नवाचारों के संरक्षण के लिए IPR की जानकारी होना आवश्यक है। ऐसी कार्यशालाएँ न केवल कानूनी समझ को बढ़ाती हैं, बल्कि नवाचार, रचनात्मकता एवं अनुसंधान को भी प्रोत्साहित करती हैं। उन्होंने कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए आयोजकों एवं प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ दीं।
इस ऑनलाइन सत्र में संस्थान के संकाय सदस्यों ने सक्रिय सहभागिता की तथा विशेषज्ञ के मार्गदर्शन से लाभान्वित हुए। कार्यशाला ने शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी आधारित विकास के क्षेत्र में बौद्धिक संपदा अधिकारों की बढ़ती प्रासंगिकता को समझने के लिए एक उपयोगी मंच प्रदान किया।
कार्यशाला के समापन पर डॉ. आलोक गुप्ता के बहुमूल्य समय एवं ज्ञानवर्धक विचार-विमर्श के लिए आभार व्यक्त किया गया। साथ ही, सभी संकाय सदस्यों की सक्रिय सहभागिता एवं सहयोग के लिए धन्यवाद दिया गया, जिनके योगदान से यह कार्यशाला एक सार्थक एवं ज्ञानवर्धक सीखने का अनुभव बनी।

