नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में हर साल होने वाली बारिश का एक बड़ा हिस्सा बिना उपयोग के नालों में बह जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली में औसतन 774.4 मिलीमीटर वर्षा होती है, लेकिन इसका लगभग 85 प्रतिशत पानी सीधे ड्रेनेज सिस्टम में चला जाता है। जल संकट और गिरते भूजल स्तर की समस्या से जूझ रही दिल्ली के लिए यह एक गंभीर चुनौती है। इसी समस्या के समाधान के लिए दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) ने बड़े स्तर पर वर्षा जल संचयन यानी रेन वाटर हार्वेस्टिंग अभियान शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य बारिश के पानी को संरक्षित कर भूजल स्तर को बढ़ाना और भविष्य की जल आवश्यकताओं को पूरा करना है।
दिल्ली जल बोर्ड द्वारा शुरू किए गए इस अभियान के पहले चरण में 500 नए रेन वाटर हार्वेस्टिंग ढांचों का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही विभिन्न सरकारी विभागों की इमारतों में पहले से स्थापित लेकिन निष्क्रिय हो चुकी प्रणालियों को दोबारा कार्यशील बनाया जाएगा। इस योजना में नगर निगम दिल्ली (एमसीडी), लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी), शिक्षा निदेशालय और अन्य सरकारी विभागों के भवन शामिल किए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि बारिश के पानी का सही तरीके से संचयन किया जाए तो इससे दिल्ली की जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।
दिल्ली में वर्ष 2001 से 100 वर्ग मीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल वाले भूखंडों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य किया गया था। इसके बाद हजारों सरकारी और निजी भवनों में यह प्रणाली स्थापित की गई। हालांकि समय के साथ नियमित रखरखाव न होने के कारण बड़ी संख्या में ये सिस्टम निष्क्रिय हो गए। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार दिल्ली के कुल 9148 सरकारी भवनों में से लगभग 7596 भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम मौजूद है, लेकिन इनमें से कई प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रहे हैं। दिल्ली जल बोर्ड अब इन सभी प्रणालियों को फिर से चालू करने की दिशा में काम कर रहा है।
अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए दिल्ली जल बोर्ड ने निविदाएं आमंत्रित की हैं और अगले कुछ दिनों में कार्यादेश जारी किए जाने की तैयारी है। अधिकारियों के अनुसार प्रथम चरण के सभी कार्यों को 30 जून तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद अनुमान है कि हर वर्ष 73 करोड़ लीटर से अधिक पानी भूजल में पुनर्भरित किया जा सकेगा। यह मात्रा लाखों लोगों की जल आवश्यकताओं को पूरा करने में मददगार साबित हो सकती है और गर्मियों में पानी की कमी की समस्या को कम कर सकती है।
दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने इस अभियान को राजधानी की जल सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है, बल्कि इसे जन आंदोलन का रूप देना होगा। उनके अनुसार केवल नए ढांचे बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पहले से स्थापित प्रणालियों को पुनर्जीवित करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सरकारी संस्थानों को इस दिशा में उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए ताकि आम नागरिक भी वर्षा जल संचयन को अपनाने के लिए प्रेरित हों।
विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली में तेजी से बढ़ती आबादी और लगातार गिरता भूजल स्तर आने वाले वर्षों में बड़ी चुनौती बन सकता है। ऐसे में रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसी पहलें जल संकट को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। वर्षा जल संचयन न केवल भूजल स्तर को बढ़ाता है, बल्कि शहरी बाढ़ की समस्या को कम करने, जल प्रदूषण को नियंत्रित करने और पानी की उपलब्धता बढ़ाने में भी मदद करता है। यही कारण है कि दुनिया के कई बड़े शहरों में इसे जल प्रबंधन का अहम हिस्सा बनाया जा चुका है।
अभियान की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली जल बोर्ड एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल भी विकसित कर रहा है। इस पोर्टल के माध्यम से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की स्थापना, रखरखाव, अनुपालन और निगरानी से जुड़ी जानकारी उपलब्ध होगी। इसके अलावा बोर्ड ने वर्षा जल संचयन प्रणालियों के निर्माण, प्रचार-प्रसार और रखरखाव के लिए 59 सेवा प्रदाताओं को सूचीबद्ध किया है। इससे परियोजना के कार्यान्वयन में तेजी आने की उम्मीद है।
दिल्ली में जल संरक्षण को लेकर शुरू किया गया यह अभियान आने वाले वर्षों में राजधानी की जल सुरक्षा के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। यदि सरकारी भवनों के साथ-साथ आम नागरिक और निजी संस्थान भी वर्षा जल संचयन को गंभीरता से अपनाते हैं, तो बड़ी मात्रा में बारिश के पानी को संरक्षित किया जा सकता है। इससे न केवल भूजल स्तर में सुधार होगा बल्कि दिल्ली को भविष्य के जल संकट से बचाने में भी महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।
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