ब्यूरो चीफ विष्णु दयाल फरीदाबाद। पारिवारिक विवाद के चलते करीब चार साल से अपने पोते से दूर रह रही एक बुजुर्ग दादी के लिए लोक अदालत से राहत की खबर सामने आई है। पति और बेटे को खो चुकी इस महिला की अपने पौत्र से मुलाकात लंबे समय से बंद थी। मामले में काउंसिलिंग के बाद दादी और बहू के बीच सहमति बन गई है।
समझौते के बाद अब दादी अपने पोते से निर्धारित परिस्थितियों के अनुसार मिल सकेंगी। इसके साथ ही दोनों के बीच वीडियो कॉल के माध्यम से बातचीत का रास्ता भी खुल गया है।
बेटे की मौत के बाद पोते से भी टूट गया संपर्क
बताया गया कि बुजुर्ग महिला के पति और बेटे की मृत्यु हो चुकी है। बेटे के निधन के बाद उसकी पत्नी अपने बच्चे के साथ अलग रहने लगी। इसके बाद दादी और पोते के बीच मुलाकात का सिलसिला बंद हो गया।
पोता दादी के लिए परिवार में बचा महत्वपूर्ण भावनात्मक सहारा था। लंबे समय तक मुलाकात नहीं होने के कारण बुजुर्ग महिला ने पोते से मिलने के लिए कानूनी रास्ता अपनाया।
करीब चार साल तक अदालत में चला मामला
दादी की ओर से पोते से मिलने की इच्छा को लेकर न्यायिक प्रक्रिया शुरू हुई। मामले को सुलझाने के लिए सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर भी प्रयास किए गए, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी।
इस वजह से मामला करीब चार वर्षों तक लंबित रहा। इस दौरान बुजुर्ग महिला अपने पोते से मिलने की मांग करती रहीं।
लोक अदालत में काउंसिलिंग से निकला समाधान
मामला लोक अदालत तक पहुंचने के बाद दोनों पक्षों की काउंसिलिंग की गई। बातचीत के दौरान परिवार के पुराने मतभेदों और उनके बच्चे पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर दोनों पक्षों को समझाया गया।
काउंसिलिंग के बाद बहू और दादी के बीच समझौते की स्थिति बनी और दोनों पक्ष कुछ निर्धारित शर्तों पर सहमत हो गए।
वीडियो कॉल के जरिए भी कर सकेंगी बात
समझौते के अनुसार बहू समय-समय पर बच्चे की उसकी दादी से मुलाकात करवाएगी। इसके अलावा दादी को अपने पोते से वीडियो कॉल पर बातचीत करने की सुविधा भी दी जाएगी।
समझौते में भविष्य की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा गया है। यदि बहू आगे चलकर पुनर्विवाह करती है, तब भी दादी और पोते के बीच मुलाकात तथा बातचीत का सिलसिला जारी रखने पर सहमति बनी है।
चार साल बाद रिश्ते को मिला एक नया रास्ता
लोक अदालत में हुए इस समझौते से न केवल एक लंबा कानूनी विवाद खत्म हुआ, बल्कि दादी और पोते के रिश्ते को भी फिर से जुड़ने का अवसर मिला है। काउंसिलिंग के जरिए निकला यह समाधान पारिवारिक विवादों में बातचीत और आपसी सहमति की भूमिका को भी सामने लाता है।

